ज़िल हिज्जा ,
इस्लामी साल का अंतिम महीना,यही वह महीना है जब एक पिता ने अपने बेटे से कहा था…………….
पेदर (पिता) बोला कि बेटा आज मैंने ख्वाब देखा है।
किताबे ज़िन्दगी का एक निराला बाब (अध्याय) देखा है।
यह देखा है कि मैं खुद आप तुझ को ज़बह करता हूँ।
खुदा के नाम से तेरे लहू से हाथ भरता हूँ.
एक पिता ने अपने 9 वर्षीय बेटे से कहा ------
ऐ मेरे प्यारे बेटे, आज मैंने एक अजीब सा ख्वाब (सपना) देखा. रात जब मै सो रहा था तो क्या देखता हूँ कि एक आवाज़ मेरे कानो में गूँज रही है.
ऐ इंसान उठो और मेरे नाम पर अपने बेटे की कुर्बानी पेश करो,और क्या देखता हूँ कि मैं तेरे गले पर छुरी चला रहा हूँ. यानि तुझ को ज़बह कर रहा हूँ. और तेरे खून में अपना हाथ डुबाये हुआ हूँ.
पुत्र ने जवाब दिया, अब्बू जान यह तो बड़ी अच्छी और खुस नसीबी की बात है. इतनी अच्छी नसीब किसी और की कहाँ है कि, खुदा आप को याद कर रहा है. खुदा आप से खुश है इसलिए उसने आप से क़ुर्बानी मांगी है. खुदा ने ख्वाब में जो आप से कहा कहा है अब्बू जान उसे कर डालिये, आप मेरी फिक्र न करें आप मुझे सब्र करने वाला पायेंगे.
सआदत मंद बेटा झुक गया फरमाने बारी पर.
ज़मीनो आसमाँ हैरान थे ताअत गुज़ारी पर
रजा जोई की ये सूरत नज़र आई न थी अबतक
ये जुरअत पेश्तर इंसान ने दिखलाई न थी अबतक
जैसे ही पिता ने अपने पुत्र से यह ख्वाब वाली बात कही, बेटे ने एक ज़रा भी हिचकिचाहट महसूस न की और अपने पिता की बातों को मानते हुए अपने क़ुरबानी देने को तैयार हो गया.
इतनी जुरअत वाला, और ऐसा वफादार बेटा दुनियाँ वालों ने आजतक नहीं देखा था. और अबतक इस धरती पर न ही ऐसे इंसान ने जनम लिया था की अपने रब और अपने खुदा के एक इशारे पर अपने 9 वर्षीय बेटे के गले पर छुरी चलाने को तैयार हो जाये.
और जानते हैं बेटा केवल तैयार ही नहीं हुआ,बल्कि अपने पिता जी को कुछ तरकीबें भी बताई। कहा अब्बू जान, हो सकता है मेरे गले पर छुरी चलाते हुए मेरे चेहरे पर आप की नज़र पड़े और आप अपने बेटी के प्यार में खो जाएं और छुरी न चला सकें इस लिए ,,,,,,,,,,,
मगर आँखों पे अपनी आप पट्टी बांध लीजेगा।
मेरे हाथों और पैरों में रस्सी बांध दीजे गा।
मुबादा मैं तड़प कर छूट जाऊँ, हाथ थर्राए।
मुबादा आप को सूरत पे मेरी रहम आजाये।
पेसर की बात सुनकर बाप ने तारीफ फ़रमाई।
ये रस्सी और पट्टी बांधनी उनको पसंद आई।
बेटे के हाथ और पैरों को बांध दिया गया. बूढ़े पिता ने भी अपनी आँखों पे पट्टी बांध ली. छुरी को भी तेज़ करली गई. सारी तैयारी मुकम्मल हो जाने के बाद.
पछाड़ा और घुटना सीनये मासूम पर रक्खा।
छुरी पत्थर पे रगड़ी हाथ को हलकूम (गला ) पर रक्खा.\
ज़मी सहमी पड़ी थी आसमां साकिन(रुकना)था बेचारा।
न उस से पेश्तर(पहले) देखा था हैरत का नज़्ज़ारा (दृश्य )
इस तरह एक बूढ़े बाप ने अपने 9 वर्षीय बेटे को अपने रब के हुक्म से चटियल मैदान में अपने बेटे के हाथ और पाऊँ को बांधकर अपने आँखों पे पट्टी बंधे हुए गले पर छुरी चला रहा था. लेकिन रब को ये कब मक़सूद था कि एक बाप अपने बेटे के गले पर छुरी चलाये और एक इंसान दुसरे इंसान का क़त्ल करे। ये तो रब ने अपने बन्दे से इम्तेहान लिया था. कि मेरा बंदा मेरे लिए क्या कुछ कर सकता हैं.
हुए जिब्रील (फरिश्ता )नाज़िल (उतरना )और थामा हाथ हज़रत का.
कहा इम्तेहां
मक़सूद था ईसारो जुर्रत का।
जिब्रील (दूत)
बड़ी तेज़ी साथ आसमान से उस चटयल मैदान में उतरे और उस जगह से बच्चे को हटाकर एक जानवर
रख दिया. और उस जानवर की क़ुरबानी हो गई.
बूढ़े पिता के कानो में एक आवाज़ गूंजी, ए इंसान तुमने
अपने ख्वाब को सच कर दिखाया. मै तुम से राज़ी हो गया.
उस बूढ़े आदमी का नाम हज़रते इब्राहीम खलीलुल्लाह और बेटे
का नाम हज़रत इस्माइल जबीहुल्लाह है.
इन्ही बाप बेटोँ की क़ुरबानी की याद को ताज़ा करने
के लिए मुस्लिम इस महीने की दस तारिख को बक़रईद के दिन जानवरों की क़ुर्बानी पेश करते
हैं.



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